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Sunday, May 17, 2020

फंसे मजदूरों का छलका दर्द, बोले-न रहने खाने की व्यवस्था है न पैदल जाने दे रहे https://ift.tt/3cFXvNn

उत्तर प्रदेश के औरेया में शनिवार तड़के सड़क दुर्घटना में हुई 24 मजदूरों की मौत के बाद से राज्य सरकारों ने सख्ती बरतनी शुरू कर दी है। प्रवासी मजदूरों को सड़क और रेल पटरी से अपने घर जाने से रोक कर श्रमिक स्पेशल ट्रेन और बस से भेजने के केंद्र के आदेश पर जमीन पर कोई कार्रवाई होती नहीं दिख रही है। यही कारण है कि रविवार को भी बड़ी संख्या में मजदूर दिल्ली से लगी दूसरे राज्यों की बॉर्डर तक पहुंच गए। इनमें से कई मजदूरों को रजिस्ट्रेशन के संबंध में भी कोई जानकारी नहीं है।
वहीं, जिन्हें पता है तो वेबसाइट ठप होने से वह रजिस्ट्रेशन भी नहीं कर पा रहे है। दिल्ली के मुख्य सचिव ने सभी जिलाधिकारियों और पुलिस आयुक्तों को निर्देश दिया था कि किसी भी प्रवासी मजदूर को दिल्ली से पैदल नहीं जाने दिया जाए। अब दिन में भी ट्रकों की चेकिंग की जा रही है। मजदूरों को शेल्टर होम में भेजा जा रहा है। इधर, गाजीपुर में प्रवासी मजदूरों की भारी भीड़ लगी है। ये सभी उत्तर प्रदेश जाने के लिए पैदल निकल पड़े हैं। औरैया में हुए हादसे के बाद यूपी सरकार ने पैदल आ रहे मजदूरों के प्रवेश पर रोक लगाई हुई है। सभी मजदूर अपने घर जाना चाहते हैं, लेकिन पुलिस ने इन्हें दिल्ली यूपी बॉर्डर पर रोक दिया है। ऐसे में गुस्साए मजदूरों ने ट्रैफिक रोकने की कोशिश की।
हालांकि पुलिस ने मजदूरों को सड़क से हटाकर ट्रैफिक व्यवस्था बहाल कर दी है। अब कई मजदूर अपने पूरे परिवार के साथ सड़कों के किनारे बैठे हैं। इनका कहना है कि अब रात यहीं गुजारने पर मजबूर हैं। इनका कहना है कि सरकार न तो उनके लिए रहने खाने की व्यवस्था कर रही है और वहीं उन्हें उनके घर अब पैदल भी नहीं जाने दिया जा रहा है। ऐसे में वो परेशान हैं कि करें तो क्या करें।

गाजीपुर बॉर्डर पर फंसे मजदूर की पत्नी ने दिया बच्चे को जन्म

| मध्य प्रदेश के सागर स्थित अपने घर जाने के लिए निकले एक मजदूर की पत्नी ने शनिवार दोपहर डॉ हेडगेवार अस्पताल में बच्चे को जन्म दिया। मां और बच्चा दोनों ठीक बताए जा रहे हैं। महिला के पति जितेंद्र अहिरवाल ने बताया कि हम मलका गंज में रहते थे और अपने गांव मध्य प्रदेश के सागर जा रहे थे। गाजीपुर में पत्नी जानकी की तबियत खराब हो गई। वह गर्भवती थी। वहां कांग्रेस के अध्यक्ष अनिल चौधरी और अन्य लोगों ने मदद की। मेरी पत्नी को अपनी गाड़ी में अस्पताल ले गए। वहां पत्नी ने बेटे को जन्म दिया है। अब दोनों ठीक हैं।

सियासत: प्रवासी मजदूरों को नहीं छोड़ेंगे बेसहारा: केजरीवाल

मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने रविवार को कहा कि उनकी सरकार कोविड-19 महामारी के खिलाफ लड़ाई के मद्देनजर आने वाले संकट के दौरान प्रवासी श्रमिकों को कभी बेसहारा नहीं छोड़ेगी। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने एक ट्वीट कर कहा कि दिल्ली में रहने वाले प्रवासी मजदूरों की जिम्मेदारी हमारी है। अगर वे यहां रहना चाहते हैं तो हम उनका पूरा ध्यान रखेंगे। यदि वे अपने घर वापस जाना चाहते हैं तो हम उनके लिए ट्रेनों की व्यवस्था करेंगे। हम उन्हें ऐसे संकट के समय में बेसहारा नहीं छोड़ेंगे। केजरीवाल ने एक अन्य ट्वीट में कहा कि सभी अधिकारियों को आदेश जारी किए हैं कि किसी प्रवासी को कोई तकलीफ नहीं होनी चाहिए।

उनके लिए जितनी जरूरत होगी, उतनी ट्रेन का इंतजाम किया जाएगा। आम आदमी पार्टी (आप) के राष्ट्रीय प्रवक्ता राघव चड्ढा ने देश के कोने-कोने से प्रवासी मजदूरों को पलायन को मजबूर होने के लिए केंद्र में बैठी भाजपा को जिम्मेदार बताया है। रविवार को डिजिटल प्रेसवार्ता से उन्होंने कहा कि आज लाखों प्रवासी गरीबों की हालत 1947 में मिली आजादी के बाद हुए बंटवारे जैसी हो गई है। उस दौरान भी इसी तरह लोग अपना घर छोड़ कर पलयान करने के लिए मजबूर हुए थे।

प्रवासी मजदूरों के रजिस्ट्रेशन के लिए डूसिब की नई वेबसाइट लांच

नई दिल्ली|प्रवासी मजदूर वेबसाइट ठप होने से रजिस्ट्रेशन भी नहीं कर पा रहे हैं। डूसिब की वेबसाइट पर https://bit.ly/2ZiZXp8 लिंक पिछले कई दिनों से ठप है। इस पर रजिस्ट्रेशन नहीं होने की शिकायत आ रही है। इसके बाद सरकार ने रविवार को एक नई वेबसाइट लांच कर दी। इस मामले में डूसिब के सदस्य विपिन राय ने बताया कि एक साथ बड़ी संख्या में मजदूरों के वेबसाइट पर रजिस्ट्रेशन करने से दिक्कत आ रही है। इसको सुधारने की कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने बताया कि अब तक वेबसाइट पर 70 हजार प्रवासी मजदूरों ने अपना रजिस्ट्रेशन कर लिया है। अब नई वेबसाइट लांच- https://bit.ly/2z8wqnF उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने एक अन्य ट्वीट कर कहा कि प्रवासी मजदूरों को श्रमिक स्पेशल ट्रेनों में जाने के लिए पहले पंजीकरण करना होगा। बिना पंजीकरण के किसी भी यात्री को ट्रेन में चढ़ने की अनुमति नहीं दी जाएगी। जो श्रमिक विशेष ट्रेनों व बसों के माध्यम से प्रस्थान करना चाहते हैं। उनको epass.jantasamvad.org/train/passenger पर आवेदन करना होगा।

33 ट्रेनों, बसों से 47,000 प्रवासी मजदूरों को भेजा घर

मनीष सिसोदिया ने रविवार को बताया कि 25 से अधिक ट्रेन और बड़ी संख्या में बसों से 35 हजार प्रवासी मजदूरों को उनके गृह राज्यों में पहुंचा दिया। रविवार को 8 श्रमिक विशेष ट्रेनें से लगभग 12,000 प्रवासी मजदूरों को उनके घर भेजा गया। सिसोदिया ने रविवार को कुछ ऐसे केंद्रों का दौरा किया, जहां दिल्ली सरकार ने प्रवासी मजदूरों के ठहरे है। उनके भोजन और चिकित्सा जांच की व्यवस्था भी की गई है।

फंसे सभी लोगों को भेजने की कर रहे व्यवस्था

दिल्ली सरकार ने दिल्ली में फंसे प्रवासियों से भी अनुरोध किया है कि वे सरकारी अधिकारियों से सूचना प्राप्त किए बिना किसी भी रेलवे स्टेशन पर जाने की कोशिश न करें। सरकार ने कहा कि दिल्ली सरकार अगले 15 दिन के भीतर सभी फंसे हुए लोगों के आवागमन को सुनिश्चित करने की व्यवस्था कर रही है। मजदूर पटरियों और सड़कों पर ना निकलें।



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तीन दिनों तक पैदल चलकर यूपी बॉर्डर पहुंचा प्रवासी मजदूर सत्येंद्र अब यूपी में प्रवेश करने का इंतजार कर रहा है। इस दौरान वह अपनी बेटी के पैर की मालिश करता हुआ।


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