(तरुण सिसोदिया/आनंद पंवार)राम मनोहर लोहिया अस्पताल में कोरोना के नोडल अधिकारी डॉ. पवन कुमार ने बताया कि कोरोना को लेकर मन में डर या खौफ न लाएं। इंफेक्शन हो गया है तो डॉक्टर के पास जाएं और इलाज कराएं। आपके आस-पड़ोस या गली-मोहल्ले में किसी को इंफेक्शन हो गया है तो उससे भेदभाव न करें। कोरोना के साथ रहने का मतलब है कि सभी काम करते हुए खुद और दूसरों का बचाव करना।
इस वक्त सतर्कता ही दवाई का काम कर सकती है। मगर जीने के लिए हमें अपने काम करते रहने होंगे। सरकार ने जो नियम लॉकडाउन के दौरान बनाए हैं। उनका अनुशासन में रहकर पालन करें। तभी स्वयं और दूसरों को इंफेक्शन से बचा सकते हैं। सोशल डिस्टेंसिंग मेंटेन रखें। किसी से बात करनी है तो उससे कम से कम एक मीटर की दूरी बनाकर रखें।
इस वक्त किसी का मुंह दूसरे के लिए बंदूक की नली की तरह है, इससे निकली कोरोना की गोली से मास्क ही बचाएगा : डॉ. अरविंद
लंग्स केयर फाउंडेशन के चेयरमैन और गंगाराम अस्पताल में वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. अरविंद कुमार ने बताया कि कोई काम घर से हो सकता है तो घर से करो। बाहर जाते वक्त मास्क लगाओ। यदि कोई बिना मास्क के है और आप उसके पास खड़े हैं तो यह आपको भी बचाएगा। लिफ्ट में जगह कम है तो सीढ़ियों का इस्तेमाल करें। इस वक्त किसी का मुंह दूसरे के लिए बंदूक की नली की तरह है जो गोली मारने का काम कर सकती है।
इसके अलावा कोई भी वस्तु जैसे लिफ्ट का बटन, कार का गेट, उसकी चाबी, जमीन न छुएं। यह बातें लोग मान लेंगे तो इंफेक्शन धीरे-धीरे कम होने लगेगा। हमें ऐसी आदत इस साल के अंत तक तो बनाकर रखनी पड़ेंगी। आदत बनाने से बन जाती है। पहले एयरपोर्ट पर आज जितनी सुरक्षा नहीं होती थी लेकिन आंतकी हमलों के कारण सुरक्षा बढ़ी और अब यह हमारे जीवन का हिस्सा बन चुकी है।
वर्क एट होम जीवन का हिस्सा होगा, ऑफिस की बैठकें डिजिटिल माध्यम से होंगी, बाहर के कपड़े पहन घर में न जाएं: डॉ. पांडव
एम्स में पूर्व विभागाध्यक्ष (कम्यूनिटी मेडिसिन) सीएस पांडव ने बताया कि यह 20वीं माहमारी हैं। कोरोना से लड़ाई में अपना बचाव ही हथियार है। बचाव करने के लिए सबसे पहले अपनी रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाना होगा। योग और व्यायाम के साथ ही समय सोना और उठना जरूरी है। अब न्यू नेशनल ड्रेस होगी मॉस्क पहनना। कोरोना देखा जाए तो एक तरह से हमारा गुरु है। वह किसी में भेद नहीं रख रहा है।
ना रंग, जाति, धर्म और देश में। अब जरूरी है कि कोरोना से बचाव के लिए दूसरो के साथ साथ सामाजिक दूरी नहीं शारीरिक दूरी का ख्याल रखना होगा। तीन फीट का न्यूनतम डिस्टेंस रखें और संभव हो तो 6 फीट। बाहर से आने पर अपने कपड़ों को तुरंत उतारकर धोएं। अब पर्स में सेनिटाइजर रखा जाएगा। कार्यस्थल पर भी बैठक की व्यवस्था दूर दूर होगी। अब हाथ मिलाने के बजाए हाथ जोड़कर स्वागत करने का चलन बढ़ेगा।
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