लॉकडाउन के दौरान दिल्ली सरकार की ओर से मजदूरों और कामगारों को खाने-पीने सुविधा मुहैया कराने के दावों के बावजूद आए दिन मजदूरों के पलायन की खबरें आ रही हैं। शनिवार देर रात सीलमपुर इलाके में भारी संख्या में प्रवासी मजदूर इकट्ठे हो गए। इन्हें समझाने का प्रयास किया गया लेकिन वे नहीं मानें और अपने घर जाने की जिद पर अड़ गए। उन्होंने जमीन पर बैठकर पुलिस और सरकार के खिलाफ नारेबाजी करनी शुरू कर दी। आखिरकार पुलिस ने इन लोगों को खदेड़ने के लिए हल्का बल प्रयोग किया। इसके बाद वहां से सभी लोग अपने अपने कमरे पर चले गए।
जानकारी के मुताबिक बीती रात बड़ी संख्या में प्रवासी मजदूर अपने घर जाने के लिए सड़क पर उतर आए। वे पैदल ही सीलमपुर मेट्रो स्टेशन तक पहुंच गए जिन्हें पुलिस ने रोक लिया। उन्हें वापस अपने कमरे पर जाने की पुलिस ने सलाह दी, लेकिन वे पीछे हटने को राजी नहीं हुए। ये लोग देर रात भारी संख्या में गांधी नगर एरिया से चले जो यूपी बार्डर की ओर जाना चाहते थे। इन लोगों को देर रात करीब डेढ़ बजे तक सड़क पर पुलिस और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। पुलिस ने इन्हें वहां से हटाने के लिए हल्का बल प्रयोग किया, जिसके बाद ही वे अपने कमरे पर वापस गए। इन मजदूरोंकी संख्या 121 बतायी गई है।
पुलिस ने इन सभी मजदूरों को अपने घर भिजवाने की व्यवस्था कराने का आश्वासन दिया, जिसके बाद ही लोग वापस लौटे। पुलिस ने लाठी चार्ज की बात से इंकार किया है। इस मामले को लेकर कोई केस दर्ज नहीं किया गया है। गौरतलब है दिल्ली में तीसरे चरण का लॉकडाउन चल रहा है। डेढ़ महीने से ज्यादा का वक्त गुजर चुका है, लोगों का काम धंधा सब ठप पड़ा है। इस वजह से मजदूरों के सब्र का बांध अब टूट रहा है, जो जैसे तैसे अपने घर जाने की जुगत में लगे हैं, लेकिन दिल्ली के आसपास के सभी बॉर्डर सील हैं और पुलिस अब भी लॉकडाउन और सोशल डिस्टेसिंग के नियमों का पालन कराने के लिए सरकार के दिशा निर्देशों का पालन कर रही है।
नंदनगरी में चेकिंग के दौरान ट्रक के अंदर मिले
नंद नगरी इलाके में भोपुरा बॉर्डर पर चेकिंग के दौरान एक ट्रक से 67 प्रवासी मजदूरों को पुलिस ने पकड़ा। ये सभी अलग-अलग स्थानों से ट्रक में सवार होकर यूपी-बिहार जाने के लिए निकले थे। जांच के लिए ट्रक को रोके जाने पर इस बात का खुलासा हुआ, सभी मजदूर ट्रक में बैठे मिले। जो बिना मास्क लगाए और एक दूसरे से सटे हुए थे। चालक दीनानाथ के पास ट्रक चलाने का कोई लाइसेंस नहीं था। इस मामले में पुलिस ने ड्राइवर के खिलाफ कानूनी कार्रवाई कर ट्रक को जब्त कर लिया।पुलिस ने बताया शनिवार तड़के इस ट्रक को चेकिंग के लिए रोका गया था। आरोपी चालक ने पुलिस को पहले गुमराह करने का प्रयास किया, जब ट्रक के पीछे तिरपाल हटाकर देखा तो उसमें बड़ी संख्या में मजदूर बैठे मिले, जिन्हें बाद में शैल्टर होम भिजवा दिया गया।
दो कैंटर में छिपकर बिहार जा रहे थे मजदूर
साउथ ईस्ट डिस्ट्रिक के कालिंदी कुंज इलाके से भी दो कैंटर में भरकर 97 दिहाड़ी मजदूरों को बिहार ले जाया जा रहा था, लेकिन रास्ते में चेकिंग के दौरान वे रोक लिए गए। इनमें 63 मजदूर एक कैंटर में जबकि 34 दूसरे में सवार थे। पुलिस ने इस केस में दोनों ही ड्राइवर के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की है। कैंटर जब्त कर लिए गए हैं।डीसीपी साउथ ईस्ट डिस्ट्रिक आरपी मीणा ने बताया इन दोनों कैंटर को 9 मई रात करीब साढ़े दस बजे चैकिंग के लिए रोका गया था। एक कैंटर में 63 मजदूर एकता विहार आरके पुरम से ओर दूसरे कैंटर में 34 मजदूर ओखला फेस वन से बिठाए गए थे। इस केस में पुलिस ने आरके पुरम सेक्टर दो निवासी उपेन्द्र सिंह यादव और ओखला फेस वन निवासी धर्मेन्द्र कुमार यादव के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर गिरफ्तार कर लिया गया।
इधर, सीएम बोले-घर जाने को इच्छुक लोगों के लिए ट्रेन की व्यवस्था कर रहे हैं
मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने लॉकडाउन की वजह से दिल्ली में फंसे प्रवासियों को आश्वस्त किया है कि उनकी सुरक्षा, खाने और रहने की जिम्मेदारी दिल्ली सरकार की है। मुख्यमंत्री ने कहा कि घर जाने के इच्छुक प्रवासियों के लिए ट्रेन की व्यवस्था की जा रही है। आप घबराएं नहीं, थोड़े दिन तक और धैर्य बनाएं रखें। आप दिल्ली छोड़कर मत जाइए। लॉकडाउन हमेशा नहीं रहेगा, कभी न कभी तो खुलेगा ही। सबको नौकरियां भी मिलेगी और सबको मजदूरी भी मिलेगी। फिर भी कोई फंसा हुआ है और घर जाना ही चाहते हैं, तो हम उसके लिए ट्रेन का इंतजाम कर रहे हैं।
ऑनलाइन प्रेसवार्ता में केजरीवाल ने कहा कि कंधे पर बच्चों को लेकर सड़क पर पैदल चल रहे मजदूरों को देख कर बहुत तकलीफ होती है। ऐसा लगता है कि पूरा सिस्टम और सरकारें फेल हो गई हैं। उन्होंने पैदल घर जा रहे मजदूरों से अपील कि कई दिनों तक बिना खाए पैदल चलना ठीक नहीं है।
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