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Tuesday, May 12, 2020

काेरोना से ठीक हुए जवानों की बदली लाइफ स्टाइल, खिड़की से झांककर देख लेते हैं बच्चों की सूरत, मोबाइल पर करते हैं बात https://ift.tt/3by6Sxy

कोरोना संक्रमण से ठीक होकर घर पहुंचे पुलिसकर्मियों की लाइफ स्टाइल बदल सी गई है। ज्यादातर समय उनका घर की चहारदीवारी के अंदर ही बीत रहा है, एक घर में रहकर भी वे अपने बच्चों से ठीक से नहीं मिल पा रहे हैं। मोबाइल फोन पर बात और दूर से बच्चों को देखकर ही वे खुश होने का मौका ढूंढ लेते हैं। उनके लिए अच्छी बात ये है आज भी पुलिस अफसर दिनभर में दो तीन बार फोन कर उनकी सुध ले रहे हैं। हालांकि, कुछ जगह यह बात भी सामने आई है जो जवान किसी काम से बाहर जाता है, वहां उसके आसपास में रहने वाले लोग दुआ-सलाम कर बचकर निकलने की कोशिश करते हैं।
विडंबना: एक घर में रहकर भी बच्चों से बनी हुई हैं दूरिया
तिलक विहार चौकी में तैनात कांस्टेबल सचिन को 7 मई को ही अस्पताल से ठीक होकर घर पहुंचा है। उसे चौदह दिन घर में ही आराम करने की डॉक्टर ने सलाह दी है। वह करन विहार किराड़ी फेस पांच में पत्नी और दो बच्चों के साथ रहता है। इन दिनों पत्नी और दोनों बच्चे घर के भूतल पर रह रहे हैं, जबकि कांस्टेबल ने खुद के लिए पहली मंजिल पर रहने की व्यवस्था कर रख रही है। सचिन के दो बच्चे तीन और पांच साल के हैं। बच्चे पिता से मिलने की जिद करते हैं तो वह उन्हें भूतल की छत पर बने लोहे के जाल से नीचे झांककर देख लेता है। बात फोन पर हो जाती है। एक ही बिल्डिंग में रहने के बाद भी पिता और बच्चों के बीच काफी दूरियां बनी हुई हैं। सचिन ने कहा उन्हें प्रतिदिन चौकी इंचार्ज, एसएचओ, डीसीपी ऑफिस से लेकर पुलिस मुख्यालय में बैठे सीनियर अफसरों के फोन आते हैं, जो उसकी सुध लेते हैं। उसने कहा डिपार्टमेंट की ओर से एक लाख की आर्थिक सहायता उसे पहले ही मिल चुकी है।
फिर नौकरी ज्वॉइन की लेकिन कमजोरी होने पर कर रहे हैं आराम
कालकाजी इलाके में रहने वाले एएसआई जीत सिंह 17 अप्रैल को ठीक होकर अपने घर लौटे थे। उनके परिवार में पत्नी और तीन बेटे हैं। एक घर में रहते हुए भी परिवार से दूरियां बनाकर रखीं। खुद को स्वस्थ महसूस होने पर उन्होंने एक मई को नौकरी ज्वॉइन भी कर ली थी। दो तीन दिन वह ट्रैफिक ऑफिस में बैठे लेकिन खुद में कुछ कमजोरी महसूस होने पर उन्हें कुछ ओर दिन घर में आराम करने की सलाह दे दी गई। उनका हौजखास ट्रैफिक सर्किल से कालकाजी सर्किल में ट्रांसफर भी कर दिया। उन्होंने कहा आज भी स्पेशल सीपी रैंक के पुलिस ऑफिस से कॉल कर उनकी सुध ली जाती है। पूछा जाता है कि किसी तरह की कोई परेशानी तो नहीं। उन्होंने कहा वह घर से न के बराबर ही निकलते हैं, क्योंकि यह बीमारी ही ऐसी थी जिस कारण लोग खुद को बचाव करने के लिए दूर से ही दुआ सलाम कर निकल लेते हैं। वहीं कुछ अन्य पुलिसकर्मी ने भी इस बात को दोहराया कि लोग पहले जैसे मिलते थे, अब ठीक होने के बाद भी वैसा नहीं मिलते और बचकर निकलने का प्रयास करते हैं। थोड़ा बुरा ताे लगता है लेकिन फिर भी ठीक है, सभी को अभी सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करने में ही भलाई है।



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